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by Aadiltaj, Saturday, February 28, 2015, 09:38 (4126 days ago)

चमत्कारी coin के नाम पर था ठगी ईयर 1616 में बने चमत्कारिक राइस पुलर क्वाईन के बारे में कहा जाता है कि ये सिक्का जिसके पास आ जाए उसकी किस्मत देखते ही देखते बदल जाती है. इन दिनों इंटरनेट पर भी सिक्के की धूम मची हुई है. नजीबाबाद का रहने वाला सिराज मैसी एंटीक वस्तु का बड़ा जानकार और सौदागर है. इंटरनेट के जरिए उसे इस बात की इंफॉर्मेशन मिली कि राइस पुलर क्वाईन को पाने की चाह रखने वालों की संख्या केवल इंडिया में ही नही बल्कि पूरे वल्र्ड में है. यहीं से उसके दिमाग में एक प्लान आया और उसने इस काम के लिए अपने साथ अन्य दस लोगों को बड़े खेल में शामिल कर लिया. दस अरेस्ट, मास्टर माइंड फरार एसओजी इंचार्ज डीएस कोहली को चार दिन पूर्व इस बात की पुख्ता सूचना मिली थी कि कुछ लोग राइस पुलर क्वाईन के नाम पर नकली सिक्का बेचने का प्रयास कर रहे हैं. इसके लिए मुंबई के एक बड़े प्रॉपर्टी डीलर से सौदा भी तय हो चुका है. ठगों की पहली लोकेशन ऋषिकेश में पाई गई. जिस पर टीम को एलर्ट कर दिया गया. संडे शाम गैैंग के मेंबर दून पहुंचे. जहां एसओजी ने उन्हें धर दबोचा. गिरफ्त मे लिए गए लोगों में विवेक शर्मा निवासी मथुरा, मणिराजन निवासी मुंबई, जय प्रकाश तिवारी निवासी दून, रमेश निवासी गंगनहर रुड़की, दिनेश कुमार निवासी मेरठ, दिलीप सागर निवासी मुंबई, वैभव पुंडीर निवासी सहारनपुर, आलोक सैनी व मनीष कुमार निवासी हरिद्वार और नवीन कुमार निवासी बिजनौर शामिल हैं. Gang के सरगना की तलाश ठगी गिरोह का मास्टर माइंड सिराज मैसी फिलहाल एसओजी के हत्थे नही चढ़ सका है. उसके धर-पकड़ के लिए प्रयास किए जा रहे हैं. एक टीम नजीबाबाद रवाना कर दी गई है. मुंबई के अंधेरी स्थित सात बंगला निवासी गुरू शरण सिंह चौहान व लखनऊ सहादतगंज के रहने वाले परवेज हुसैन आपस में अच्छे मित्र हैं. करीब एक माह पूर्व मैसी ने इंटरनेट के माध्यम से गुरू शरण को अपने जाल में फंसाया. व्यक्ति ने राइस पुलर क्वाईन की पुष्टि के लिए लिए लखनऊ से अपने फ्रेंड परवेज को दून भेजा. जहां ठगों ने उसे भी अपने विश्वास में ले लिया. यहां से वापस जाकर उसने गुरू को बताया कि इनके पास वास्तव में चमत्कारी सिक्का है. जिस पर खरीद फरोख्त के लिए रेट की बार्गेनिंग होने लगी. 21 सौ करोड़ का सिक्का 80 लाख में सिराज ने गुरू शरण को बताया कि इस चमत्कारी सिक्के की कीमत ब्रिटेन में 21 सौ करोड़ रुपए है, लेकिन वहां पर इनकी पहचान नहीं है. इसलिए क्वाईन को एक करोड़ में बेच रहे हैं. बाद मे रेट 80 लाख तक आ गया. ठग के मुताबिक उसे यह सिक्का पिथौरागढ़ से मिला था. यह इससे पहले भूटान के नरेश के पास था. सिक्का चमत्कारी है ये सिद्ध करने के लिए संडे शाम गुरू शरण को एक होटल में बुलाया गया. जहां दो लाख रुपए रखते हुए सिराज ने कहा अगर सिक्का चमत्कार नहीं कर सका तो रुपए तुम्हारे. दरअसल, वहां एक बर्तन में चावल रखा था जिसमें सिक्का डालते ही उसका कलर चेंज हो जाना था. ठीक इसी दौरान एसओजी की टीम ने सभी को रंगे हाथ पकड़ लिया. तांबे का सिक्का था ठगों के पास टीम द्वारा जब कथित चमत्कारी सिक्के की पड़ताल की गई तो वह तांबे का निकला. जिस पर हल्दी और नींबू का रस लगा हुआ था. इसे चावल के दाने से लगाते ही उसका रंग भूरा हो जाता है. बाद में ठग इसको चमत्कार बताकर ठगी करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने उनके सपनों पर पानी फेर दिया. सच पता लगने के बाद गुरू शरण और उसके साथ परवेज ने अपना सिर पकड़ लिया. उन्हें अंदाजा तक नहीं था कि उनके साथ कितनी बड़ी ठगी होने वाली थी. पुलिस ने दोनों को अपना गवाह बनाकर कोर्ट में पेश करने का निर्णय लिया है. क्या है राइस पुलर क्वाईन का सच राइस पुलर क्वाईन के संदर्भ में मिली इंफॉर्मेशन काफी अहम है. इस सिक्के का निर्माण ईयर 1616 में इंडिया में ही किया गया था. मान्यता है कि इस क्वाईन में नौ ग्र्रहों की उर्जा समाहित है. यदि इसे कार्बन पेपर पर रखा जाए तो इसकी एनर्जी बनी रहती है. कार्बन पेपर से बाहर निकलते ही इसकी शक्ति इलेक्ट्रिक यंत्रों का कार्य बाधित कर देती है. क्वाईन में इरिडियम और कॉपर का यूज अधिक किया गया है. प्राचीन समय में इसमें कुल पांच धातु इस्तेमाल किए गए थे. कहते हैं यह सिक्का जिसके पास रहता है वह हर लिहाज से मजबूत बन जाता है. Internet पर फैला है ठगी का जाल इस अनोखे सिक्के की चाह रखने वाले पूरी दुनिया में फैले हुए हैं और यही वजह है कि इंटरनेट पर इसके लिए जमकर बोली भी लगाई जा रही है. संडे शाम तक राइस पुलर क्वाईन को लेकर लगाई गई आखरी बोली बीस सौ लाख से उपर की पहुंच चुकी थी. ठग इसी का फायदा उठाते हैं. नेट के थ्रू ठगों का जाल वल्र्ड के अलग-अलग देश में फैलता जा रहा है. सिक्के को पाने की ख्वाहिश में लाखों लोग हर रोज लगने वाले बिट में शामिल होते हैं. कई तो इसमे पूरी तरह बर्बाद भी हो चुके हैं. फिर भी लालच थमने का नाम नहीं ले रहा है.

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